नेपालगञ्ज, असार २८
नेपालगञ्जको सक्रिय उर्दू साहित्यिक संस्था गुलजार–ए–अदब अदबद्वारा आयोजित मासिक  गोष्ठीको ५सय८८औँ श्रृंखला शनिवार महेन्द्र पुस्तकालयमा वरिष्ठ शायर अब्दुल लतीफ ‘शौक’को अध्यक्षतामा सम्पन्न भएको छ ।
‘किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता’ शीर्षकमा आयोजना गरिएको उक्त गोष्ठीमा बाँके, नेपालगञ्जका स्थापित र नवोदित शायरहरूले प्रेम, सामाजिक यथार्थ, अध्यात्म, आस्था र मानवता जस्ता विविध विषय समेटिएका उत्कृष्ट गजलहरू प्रस्तुत गरे ।
शायरहरूले प्रस्तुत गरेका केही उल्लेखनीय शेरहरू यसप्रकार छन्,


तुमही खुद टिक नही पाते हो अउर सब से यह भी कहते हो किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता । (अब्दुल लतीफ ‘शौक’)
हमारे दरमियाँ उन के कोई चेहरा नहीं रहता,
कई हमवार राहें हैं, कोई पहरा नहीं रहता। (सैय्यद अशफाक रसूल हाशमी ‘शैय्यद नेपाली’)
जो अपना हो गया हो फिर वह बेगाना नहीं रहता,
कि दिल में बसने वाला शख्स अन्जाना नहीं रहता। (मुस्तफा अहसन कुरैशी ‘अहसन’)
ताअल्लुक काेई भी इन्सान का ज्यादा नही रहता,
कभी इन्सा नही रहते कभी रिसता नही रहता । (सैय्यद आदिल सरवर “सरवर नेपाली”)
मेरा बातिल मेरे जाहिर से ज्यादा खूबसूरत है,
किताबें दिल खुला है, देख लो नुक्ता नहीं रहता। (अन्सर नेपाली)


रहा करते हैं गर्दिश में, कोई ठहरा नहीं रहता,
फलक के चाँद तारों पर कोई पहरा नहीं रहता।
तुम्हारे साथ मे वह आज भी पटना नही रहता,
मगर यह बात भि सच है वह अब शिमला नही रहता ।( वशीम आलम मजहरी)
रहा करते हैं गर्दिसफमे काेई ठहरा नही रहता,
फलक के चाँद ताराें पर काेई पहरा नही रहता । (इशमाइल अन्सारी)
किसी दरिया का पानी बेवजह ठहरा नहीं रहता,
चमन गुलजार होता है, वहाँ सहरा नहीं रहता। (मो. आरिफ अन्सारी)
मेरा उस घर पर बेकारी मे ही जाना नही रहता,
कभी पानी नही रहता, कभी दाना नही रहता ।( मेराज अहमद “हिमालय”)
किसी बे–इश्क दिल पर दर्द का साया नहीं रहता,
कि मुर्दे के बदन से रूह का रिश्ता नहीं रहता। (सहबाज ‘साहीन’)

जुमा आया जुमें की रात गई,
वह न आया सुहानी रात गई ।। (जहिरुल हक ‘जिनु’) कार्यक्रममा विशेष डा. उमेर सादिक, राशिद कमाल, बब्बु फारुकी, आसिम सरवर लगायतका साहित्यप्रेमी र गजल पारखीहरूको उल्लेखनीय उपस्थिति रहेको थियो। गोष्ठीले उर्दू साहित्य, विशेषतः गजल विधाको प्रवद्र्धनमा महत्वपूर्ण भूमिका खेलिरहेको सहभागीहरूको भनाई रहेको थियो । अगामी गजल गोष्ठी साउन ३१ गते शनिवार ‘जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली, कभी तो उनका हिसाब होगा’ शिर्षकमा हुने कुरा संस्थाका सचिव मुस्तफा हसन कुरैशीले जानकरी गराउनुभयो । गोष्ठीकोे सञ्चालन नुरुल हसन राईले गर्नुभएको थियो ।

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